वनोपज-आधारित आजीविका और न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति का बैगा जनजातीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रभाव: छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) ज़िले के ग्रामों का तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • घुरवा राम श्याम and प्रो. (डॉ.) आर. एन. सिंह

Abstract

यह अध्ययन छत्तीसगढ़ के कवर्धा ज़िले के बोड़ला और पंडरिया ब्लॉकों के गावों में वनोपज-आधारित आजीविका, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नीति तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति का तुलनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। दोनों क्षेत्र उच्च वन-आवरण और बड़ी बैगा जनजातीय आबादी वाले हैं जहाँ आय के प्रमुख स्रोत कृषि, मजदूरी और वनोपज हैं। अध्ययन में प्राथमिक और द्वितीयक आकड़ों का मिश्रित प्रयोग किया गया। प्राथमिक डेटा को समेकित रूप में विश्लेषित किया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका विविधीकरण, कार्य-दिवस प्रतिरूप, उपभोग, अवसंरचना, वनोपज निर्भरता, MSP जागरूकता और बाजार मूल्य असंगति जैसे तत्वों को वैज्ञानिक ढंग से समझने का प्रयास किया गया। परिणाम दर्शाते हैं कि पंडरिया शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में अधिक वंचित है तथा वनोपज पर अधिक निर्भरता वाला विकासखंड है। MSP की जागरूकता मात्र 12-20 प्रतिशत लोगों में पाई गई, जिससे बिचौलिया-निर्भरता और आय-हानि बढ़ जाती है। चरोटा, वनजीरा, डोरी जैसे उत्पादों में MSP बाजार की तुलना में कम है, जबकि लाख और शहद में MSP अधिक है लेकिन संग्रहण मात्रा सीमित रहती है। अध्ययन यह निष्कर्ष देता है कि दोनों विकासखंडों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर है और वनोपज-आधारित MSP नीति को प्रभावी बनाने हेतु बाजार-संगत मूल्य, प्रसंस्करण इकाइयों और सूचना-तंत्र की आवश्यकता है। यह शोध नीति-निर्माण और क्षेत्रीय विकास के लिए उपयोगी साक्ष्य प्रस्तुत करता है।

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Published

2007-2025

How to Cite

घुरवा राम श्याम and प्रो. (डॉ.) आर. एन. सिंह. (2026). वनोपज-आधारित आजीविका और न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति का बैगा जनजातीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रभाव: छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) ज़िले के ग्रामों का तुलनात्मक अध्ययन. International Journal of Economic Perspectives, 19(12), 21–37. Retrieved from https://ijeponline.com/index.php/journal/article/view/1077

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