जनपद चम्पावत मंे विकासखण्ड वार स्त्री-पुरूष अनुपात (लिंगानुपात) का संक्षिप्त अवलोकन-वर्ष 2001 एवं 2011
Abstract
लिंग को व्याकरण विद्वानों द्वारा यह कह कर परिभाषित किया गया है, कि जिससे किसी को पुरूष या महिला होने का बोध हो सके उसे लिंग कहते हैं। जनसंख्या का लिंग संघटक प्रायः एक अनुपात द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जिसे लिंगानुपात या स्त्री-पुरूष अनुपात कहते हैं। भारत में यह अनुपात प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में दर्शाया जाता है। भारत एक बहु आबादी वाला राष्ट्र यहां पर अनेक स्तरों पर विविधता विद्यमान है। भारतीय आबादी का लगभग आधा हिस्सा स्त्रियों का है, परंतु अभी भी स्त्रियों को समाज में बराबरी का दर्जा न मिल सका है। अतः वर्तमान में आवश्यकता इस बात की है कि लिंगी भेदभाव को समाप्त कर स्त्रियों की स्थिति को एक अच्छे मुकाम पर पहुंचाया जाए, ताकि स्त्रियां भी मानव समाज के विकास में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें। स्त्री की इस महत्ता को देखते हुए अमेरिका विद्वान ‘बेंजामिन’ ने लिंगानुपात के संदर्भ में उनका कथन है कि लिंगानुपात या स्त्री-पुरुष अनुपात किसी भी देश, प्रदेश के आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण लक्षण है। जिससे उस क्षेत्र का विश्लेषण अच्छी तरीके से की जा सकती है। इसका प्रभाव जनसमूह वृद्धि वैवाहिक दर एवं व्यावसायिक और असंरचना पर भी पड़ता है। वर्तमान समय में भारत एवं विश्व स्तर विकाशील देशों में स्त्री-पुरुष अनुपात औसत से कम दर्ज हुई है। इसका मुख्य कारण पुरुष शिशु को पाने की ज्यादा चेष्टा है। स्त्री भू्रण हत्या के कारण ही बच्चा पैदा होने के समय पुरुष बच्चों की संख्या ज्यादा बनी रहती है ( ट्रीवार्था, जी0टी0 1969)।









