भारतीय राष्ट्रवाद का विकास: 1857 से 1947 तक
Abstract
यह शोध पत्र “भारतीय राष्ट्रवाद का विकास: 1857 से 1947 तक” विषय पर केंद्रित है, जिसमें राष्ट्रवाद की अवधारणा के ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण किया गया है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से प्रारंभ होकर यह अध्ययन भारतीय राष्ट्रीय चेतना के क्रमिक विस्तार को रेखांकित करता है। प्रारंभिक राष्ट्रवाद, जो मुख्यतः शिक्षित मध्यम वर्ग तक सीमित था, धीरे-धीरे उग्र राष्ट्रवाद और स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से व्यापक रूप ग्रहण करता है। इसके पश्चात महात्मा गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित होता है, जिसमें विभिन्न वर्गों-किसान, मजदूर, महिलाएँ और युवा-की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है। शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रवाद के साथ-साथ सांप्रदायिकता का उदय भी हुआ, जिसने अंततः भारत के विभाजन का मार्ग प्रशस्त किया।
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Published
2007-2025
How to Cite
भावना . (2026). भारतीय राष्ट्रवाद का विकास: 1857 से 1947 तक. International Journal of Economic Perspectives, 14(1), 345–352. Retrieved from https://ijeponline.com/index.php/journal/article/view/1107
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