सतत विकास और विकसित भारत 2047: पर्यावरणीय चुनौतियाँ 

Authors

  • डाॅ. सिद्धार्थ राव and डाॅ. भावना

Abstract

      सतत विकास (ैनेजंपदंइसम क्मअमसवचउमदज) वर्तमान वैष्विक परिप्रेक्ष्य में एक अनिवार्य अवधारणा बन चुका है, विशेषकर तब जब विष्व जलवायु परिवर्तन, संसाधनों के अत्यधिक दोहन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। भारत ने वर्ष 2047 तक ”विकसित भारत” बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है जो केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय संरक्षण और दीर्घकालिक स्थिरता पर भी आधारित है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य सतत विकास के सिद्धांतों के आलोक में भारत के विकास लक्ष्यों का विश्लेषण करना तथा पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान करना है जो इस लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक बन सकती हैं। अध्ययन में यह पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन, वायु एवं जल प्रदूषण, जैव विविधता का ह्रास, भूमि क्षरण तथा प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ हैं जिनका समाधान किए बिना सतत विकास संभव नहीं है।

 

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Published

2007-2025

How to Cite

डाॅ. सिद्धार्थ राव and डाॅ. भावना. (2026). सतत विकास और विकसित भारत 2047: पर्यावरणीय चुनौतियाँ . International Journal of Economic Perspectives, 20(6), 1–8. Retrieved from https://ijeponline.com/index.php/journal/article/view/1112

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